Friday, June 11, 2021
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BCLसे कैसे जुड़ा IPLकैंप में शामिल कराने के नाम पर वसूली का आरोपी अभय सिंह?:मनोज कुमार


  • आईपीएल कैंप में शामिल कराने के नाम पर वसूली का आरोपी अभय सिंह कैसे जुड़ा था बीसीएल से ?
  • कहीं बूकियों से तो नहीं जुड़ा था आयोजन का तार ! अब निगाहें बीसीसीआई की जांच टीम पर

PATNA 05 जून: बिहार क्रिकेट लीग के आयोजन पर बीसीसीआई की रोक के आदेश के बावजूद बीसीए की मनमानी मामले की जांच में जिस तरह से विलंब किए जा रहे हैं या यों कहें कि इस मामले में जांच से परहेज की जा रही है यह मामला अपने आप में संदिग्ध प्रतीत होने लगा है।

क्योंकि बीसीएल के प्रयोजकों में अभय सिंह नाम का एक वह शख्स भी शामिल बताया जा रहा है जिसके बूकी होने का संदेह है उस पर यूपी में आईपीएल में पैसे लेकर खिलाड़ियों को प्रवेश दिलाने के आरोप का मामला भी चल रहा है।ये बाते एमडीसीए(उत्पल रंजन गुट)के सचिव एवं मुजफ्फरपुर के स्वतंत्र पत्रकार मनोज कुमार ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कही है।

श्री कुमार बीसीएल पर सवाल उठाते हुए आगे कहा है कि” इस मामले में बीसीसीआई और अभय सिंह आमने-सामने हैं । यह जानते हुए भी बिहार क्रिकेट संघ के पदाधिकारियों और बीसीएल की गवर्निंग काउंसिल द्वारा संदिग्ध उत्तर प्रदेश निवासी अभय सिंह से बीसीएल के खाते पर पाँच लाख रूपया जमा कराने के पीछे कैसी मंशा थी यह तो आयोजन समिति ही बता सकेगी । लेकिन ऐसे संदिग्ध माहौल में यह संदेश भी बल पा रहा है कि बीसीए के आयोजन में कहीं न कहीं बूकी का हाथ भी रहा है और यह आयोजन खेल से अधिक सट्टा बाजी को परवान चढ़ाने की नीयत से आयोजित किया गया था ।

क्योंकि आयोजन के पूर्व बीसीए द्वारा जो लंबे चौड़े दावे किए गए थे वह आयोजन समापन तक बिल्कुल कोरा साबित हुआ है। अन्यथा क्या वजह है कि आयोजन समिति विजेता और उपविजेता टीम को घोषित राशि देने में भी असमर्थ हो गई ? जिन खिलाड़ियों पर बोली लगे थे उनका भुगतान भी नहीं किया गया ? जबकि बीसीएल के खाते में अभी भी राशि उपलब्ध है और उन पैसे का गैर खेल मद में बंदरबांट भी जारी है।

उन्होंने कहा” हमने बीसीए के पदाधिकारियों जब इस बारे में बात किया और यह सच है कि बीसीएल के खाते से पैसा निकासी के मामले पर संयुक्त सचिव कुमार अरविंद ने अपनी अनभिज्ञता जाहिर कर आयोजन में मनमानी का संकेत दे दिया है। बीसीए उपाध्यक्ष दिलीप सिंह ने भी बीसीएल के आयोजन में बीसीए का सीधा हाथ होने से पल्ला झाड़ते हुए दो टूक कहा है कि इस आयोजन का जिम्मा गवर्निंग काउंसिल पर था।

हालांकि सीईओ मनीष राज ने दो टूक कहा बीसीए और बीसीएल अलग-अलग संस्थाएं नहीं है । बीसीएल बीसीए का ही अंग है । ऐसे में उसके खाते पर उपलब्ध राशि का बीसीए द्वारा उपयोग करना कहीं से भी गैर संवैधानिक नहीं माना जा सकता। उन्होंने बीसीएल के

आयोजन में बूकियों का हाथ होने के सवाल पर स्पष्ट किया कि इस संबंध में एंटी करप्शन इकाई के दिशा निर्देश पर गवर्निंग काउंसिल ने काम किया था । जो भी आरोपी सामने आए थे या तो उन्हें आयोजन से अलग किया गया था या उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही भी की गई थी।

हालांकि अभय सिंह के मामले में उन्होंने स्पष्ट कुछ भी बताने से इनकार किया और कहा कि इस मामले में जो कार्रवाई की गई है उसकी संचिका सुरक्षित है।

श्री कुमार ने कहा” जानकारी के लिए बता दें कि 77 सीटी केश जो स्पोर्ट्स एडीक्सन वनाम अभय सिंह के मामले हैं और साउथ ईस्ट कोर्ट नई दिल्ली में विचाराधीन है। इस मामले में अभय सिंह चार मार्च 2021 को पेश नहीं हुआ है और इस मामले में अगली तारीख 24 जुलाई 2021 दिया गया है। यह मामला आईपीएल टीम में शामिल कराने के नाम पर वसूल की गई राशि की वापसी के लिए दिए गए चेक के बाउंस करने का है।

लखनऊ का रहने वाला अभय सिंह खुद को राजस्थान 23 टीम का सदस्य बताता है। इस संबंध में रिंकू नामक व्यक्ति ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर शिकायत किया है। शिकायत में बताया गया है कि वे लोग बाथा सांवली अलीगंज, निवासी अभय सिंह के बहकावे में आ गए और आईपीएल टीम में शामिल कराने के लिए अभय सिंह के बैंक खाते में छह खिलाड़ियों ने साठ साठ हजार रुपए दिया। अभय सिंह ने इन लोगों को आईपीएल कैंप का लेटर भी दिया। रिंकू के मुताबिक अभय ने रिंकू को आर सी बी, अभिषेक और राम को सनराइजर्स हैदराबाद, मधुषेक को राजस्थान रॉयल्स और रोहित तथा आशुतोष को दिल्ली कैपिटल्स के कैंप का लेटर दिया था।

अभय सिंह के यूरोपियन क्रिकेट लीग में भी जुड़ने की कोशिश की खबर मिल रही है। बहरहाल यह तो स्पष्ट है कि बीसीएल के आयोजन के दौरान सट्टा का मामला सामने आया था और विरोध की आशंका को देखते हुए आयोजन समिति के द्वारा इस मामले में एंटी करप्सन इकाई का सहारा लिया गया था। बावजूद इसके बीसीसीआई को दागदार बनाने की मुहिम में शामिल अभय सिंह की संगति और साथ की क्योंकर जरूरत पड़ गयी इसका जबाब या तो आयोजन समिति दे सकेगी या फिर बीसीसीआई की जांच समिति ही इस मामले में स्थिति स्पष्ट कर सकती है।



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