दिल्ली 16 मई: वो कहते है ना बिना गुरु के ज्ञान प्राप्त नही किया जा सकता और एक सच्चा मार्गदर्शक के बिना सही मार्ग पर नही चला जा सकता ।जी हाँ भारतीय टेस्ट क्रिकेट टीम के स्टैंड बाई में जगह बनाने वाले देहरादून के क्रिकेटर अभिमन्यु ईश्वरन के जीवन मे वही सच्चा गुरु और मार्गदर्शक बनकर आये गुरुप्रीत सिंह हैरी।।

एक इंटरव्यू में अभिमन्यु ईश्वरन ने बताया कि मैं जब सिर्फ 14 साल का था तब अपने पापा के साथ देहरादून से दिल्ली जी.एस हैरी क्रिकेट एकेडमी एक क्लब क्रिकेट मैच खेलने गया था जिसमे मुझे खेलते हुए गुरुप्रीत सिंह हैरी सर ने देखा था।

मेरे खेल को देखर हैरी सर ने कहा कि आप बहुत अच्छे खेलते हो,लेकिन दिल्ली क्रिकेट में मौका मिला मुश्किल है इसलिए आप बंगाल जाकर खेलो। हैरी सर के कहने पर ही उसके बाद मैं बंगाल चला गया और वहां पर ट्रेनिंग करने और क्लब लेवल के मैच खेलने लगा। मुझे बंगाल में अलग-अलग ऐज ग्रुप से खेलने का मौका मिला। फिर मुझे रणजी में बंगाल टीम से मौका मिला।

देखें मीडिया को दिए इंटरव्यू में अभिमन्यु ने किन -किन प्रश्नों का जबाब दिया।

इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज में भी आप स्टैंडबाय के तौर पर शामिल थे, तब आपका अनुभव कैसा रहा?

इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज के दौरान पहली बार मुख्य टीम के साथ स्टैंडबाय के तौर पर टीम में शामिल था। मुझे काफी कुछ सीखने को मिला। सीनियर प्लेयर विराट कोहली, अंजिक्य रहाणे और रोहित शर्मा ने मुझे टिप्स दिए, वहीं कोच रवि शास्त्री से भी बहुत कुछ जानने को मिला। इसके साथ ही मुझे मानसिक रूप से अपने को मजबूत करने का मौका मिला। टेस्ट मैच की तैयारियों के बारे में जानने का मौका मिला। इस स्तर के मैच में मानसिक स्तर किस तरह का होना चाहिए, वह जान पाया। दबाव में किस तरह अपने को मानसिक रूप से मजबूत रखना है और हार के बाद भी किस तरह वापसी करना है, इसे भी समझा। इंग्लैंड के खिलाफ पहले टेस्ट में टीम को हार मिली। यह सीरीज वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में जगह बनाने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण थी। ऐसे में पहले मैच में हार के बाद टूर्नामेंट में टीम ने वापसी की। मैं जान पाया कि हारने के बाद वापसी करना कितना महत्वपूर्ण है और अपने को हार से उबरने के लिए क्या करना पड़ता है।

टीम में बतौर ओपनर रोहित शर्मा, शुभमन गिल, मयंक अग्रवाल केएल राहुल जैसे खिलाड़ी हैं और पृथ्वी शॉ भी दावेदार हैं। ऐसे में जगह बना पाना कितना मुश्किल है?

मुझे केवल एक मौके की तलाश है। मौका मिलने पर मैं अपने को साबित कर दूंगा। मैं किसी भी बैटिंग ऑर्डर पर बल्लेबाजी करने के लिए तैयार हूं। उम्मीद है कि मुझे मौका अवश्य मिलेगा।

अभिमन्यु ने बंगाल की ओर से घरेलू क्रिकेट में अब तक शानदार प्रदर्शन किया है।अभिमन्यु ने बंगाल की ओर से घरेलू क्रिकेट में अब तक शानदार प्रदर्शन किया है।
घरेलू टूर्नामेंट में आपका प्रदर्शन बेहतर रहा है। फर्स्ट क्लास में आपका औसत करीब 44 है और लिस्ट में 48 के औसत से रन बनाए हैं।

फिर भी IPL में खरीदार नहीं मिले?

घरेलू टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन की बदौलत ही मुझे इंडिया ए और मुख्य टीम में स्टैंडबाय के तौर पर शामिल किया गया। हालांकि मुझे IPLमें खरीददार नहीं मिले, इससे मुझे निराशा भी हुई, लेकिन मुझे उम्मीद है कि भविष्य में IPL में खेलने का मौका अवश्य मिलेगा। IPL वर्तमान में दुनिया की सबसे बड़ी लीग है। ऐसे में इस लीग में हर क्रिकेटर खेलना चाहता है। मैं भी इसमें खेलना चाहता हूं।

आप अभी तैयारी कहां पर कर रहे हैं?

मैं फिलहाल देहरादून में अपने कोच अपूर्व देसाई और मनोज रावत की निगरानी में अपनी एकेडमी में ट्रेनिंग कर रहा हूं।

आप क्रिकेट में कैसे आए?

मेरे पापा देहरादून में चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं। वे क्लब लेवल की क्रिकेट भी खेलते थे। मैं भी कई बार उनके साथ जाता था। धीरे-धीरे मेरा मन क्रिकेट में लगने लगा। जिसके बाद मैने इसे करियर के तौर पर चुना। पहले क्रिकेट खेलने के लिए देहरादून से दिल्ली आया। उसके बाद बंगाल गया।

आपका नाम अभिमन्यु ईश्वरन रखे जाने की क्या वजह है?

मेरे पापा ने मेरे जन्म से पहले ही एक दोस्त के साथ मिलकर क्रिकेट एकेडमी शुरू की थी। मेरे पापा तमिल हैं जबकि मां पंजाबी हैं। पापा ने एकेडमी का नाम अभिमन्यु रखा था, क्योंकि अभिमन्यु ने मां के पेट में ही चक्रव्यूह को भेदना सीख लिया था। इसलिए मेरे जन्म के बाद मेरा नाम उन्होंने अभिमन्यु रख दिया।अभिमन्यु ने इंटरव्यू दैनिक भास्कर को दिया था।

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