Sunday, June 13, 2021
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  • बीसीएल के मनमाना आयोजन पर उभरा सवाल
  • क्या अमित शाह और जय शाह की आड़ में चल रहा है बीसीए का खेल
  • चर्चा है सैंया भये कोतवाल अब डर काहे का

PATNA 25 मई: बिहार क्रिकेट संघ पिछले डेढ वर्षों से “सैंया भए कोतवाल अब डर काहे का” की कहावत को चरितार्थ कर रहा है । कमेटी के नवनिर्वाचित अध्यक्ष ने प्रारंभ से ही खुद को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का वरदहस्त ठहराते हुए सी ओ एम के सदस्यों के साथ-साथ जिला इकाइयों को भी धमकाने और मनमानी का चाबुक चलाने का खेल जारी रखा है ।ये बाते मुजफ्फरपुर जिला क्रिकेट संघ के सचिव एवं स्वतंत्र पत्रकार मनोज कुमार ने खेलबिहार से कही है।।

उन्होंने आगे कहा” जहां तक बीसीए अध्यक्ष की मनमानी का सवाल है पदभार संभालते ही जिला इकाइयों के ऐसे मामले जो लोकपाल के न्यायालय में विचाराधीन थे आनन-फानन में खुद की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी बनाकर तथ्यों और साक्ष्यों के विपरीत अपने मन के हिसाब से फैसले का फरमान जारी करना लोकतांत्रिक प्रणाली पर कुठाराघात था। बाद के दिनों में बीसीसीआई द्वारा बीसीए को चतुष्कोणिय महिला क्रिकेट प्रतियोगिता के सफल मेजबानी पर पीठ थपथपाने के महज आठ दिनों बाद ही सचिव संजय कुमार पर येन केन प्रकारेण निलंबन का फरमान जारी करना मनमानी का नतीजा था ।

आगे के दिनों में कारपोरेट जगत की तरह बीसीसीआई से अनुदानित राशि का महँगे दफ्तर, निजी सचिवों, महाप्रबंधको की नियुक्ति और लोकपाल, एथिक आफिसर व सीईओ को मुँह बोली वेतन निर्धारित किया जाना भी मनमानी का ही नतीजा था। वही आईपीएल की तर्ज पर बिहार में बीसीएल का आयोजन बगैर बीसीसीआई की अनुमति कराने की शुरुआत और आयोजन के मध्य में बीसीसीआई द्वारा बीसीएल रोकने के आदेश की अनदेखी कर आयोजन पूर्ण कराना अध्यक्ष की मनमानी का चरम था ।

बिहार क्रिकेट लोगों को यह लग रहा था कि बीसीसीआई अध्यक्ष के द्वारा निरंतर संविधान के विपरीत उठाए जा रहे कदमों पर अनुशासनात्मक चलाया जाएगा लेकिन बार-बार की चुप्पी को भी अध्यक्ष ने अस्त्र बनाया और बिहार क्रिकेट संघ में यह भ्रम जाल फैलाया कि बीसीसीआई उनका कुछ नहीं बिगाड़ेगी क्योंकि उनके सिर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का हाथ है और बीसीसीआई सचिव जय साह उनके मित्रवत हैं ।

बहरहाल बिहार क्रिकेट संघ में अध्यक्ष द्वारा चलाए जा रहे झूठ के तिलिस्म का ही नतीजा है की बीसीएल में बोली के आधार पर खेलने वाले खिलाड़ियों और विजेता – उपविजेता टीम के निर्धारित राशि तक नहीं दिए गए। जबकि इस आयोजन के नाम पर बड़े पैमाने पर वसूली और सट्टा चलाने की भी अपुष्ट खबर है।

अब जबकि बीसीएल को बीसीसीआई की ओर से अवैध घोषित किए जाने पर उन तमाम तकनीकी पदाधिकारी और खिलाड़ियों के भविष्य पर भी सवालिया निशान खड़ा हो गया है जो इसमें सहभागी बन बीसीसीआई के कार्रवाई का पात्र बन गए हैं लोगों की निगाहें फिर से केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर है ? जय शाह उनको इंकार करने से रहे !



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