Friday, June 11, 2021
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बीसीए अध्यक्ष के असंवैधानिक कार्यो के कारण बीसीए की संबद्दता BCCI कर सकता है समाप्त:संजय कुमार(सचिव बीसीए)


  • बीसीए के विवादित अध्यक्ष के असंवैधानिक कारनामों पर लगाम नहीं लगाई गई तो संघ कि संबद्दता बीसीसीआई से समाप्त हो सकती है : संजय कुमार
  • बीसीएल पर न्यायालय द्वारा लगी रोक खिलाड़ियों को हतोत्साहित करने वाला है

पटना 2 मार्च : बिहार क्रिकेट लीग के आयोजन पर लगी न्यायालय द्वारा रोक यह प्रमाणित करती है की बीसीए के विवादित अध्यक्ष कभी संविधान का पालन नहीं कर सकते हैं और नहीं तो बीसीए को विकास के मार्ग पर ले जा सकते हैं। ये बाते बीसीए सचिव संजय कुमार ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है।

उन्होंने आगे कहा” अध्यक्ष जरूरत के हिसाब से लोगों का उपयोग करना, फिर उन्हे अपमानित करना, खेल और खिलाड़ी के विकास के कार्यों को छोड़कर अन्य सभी कार्य करना तथा बीसीए के पूर्व पदाधिकारियों और सम्मानित अधिवक्ताओं को गुमराह करना बीसीए के विवादित अध्यक्ष की आदत बन गई है।

बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव संजय कुमार ने विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि अगर यही स्थिति रही तो वो दिन दूर नहीं जब इनके असंवैधानिक कारनामों के कारण बिहार क्रिकेट एसोसिएशन कि संबंद्ध्ता भी बीसीसीआई के समाप्त हो जाएगी, और बिहार के क्रिकेटरों का भविष्य एक बार फिर से खतरे में पड़ जाएगा।

बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव ने जारी विज्ञप्ति में कहा है कि युवा खेल फाउंडेशन के चेयरमैन कुंदन कुमार ने हमें मेल करके सूचित किया है कि इलीट स्पोर्ट्स के द्वारा 21 मार्च 2021 से घोषित बिहार क्रिकेट लीग पर न्यायालय द्वारा रोक लगा दी गई है। जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि बीसीए के विवादित अध्यक्ष राकेश कुमार तिवारी जिस तरह से बीसीए को संचालित कर रहे हैं, वो बिहार के क्रिकेटरों के हित में नहीं है।

श्री तिवारी जब जिस व्यक्ति को होता है बीसीए में सूसोभित करते हैं तो कभी उनकी उपेक्षा कर उन्हे त्याग पत्र देने को मजबूर कर देते हैं। बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष गोपाल बोहरा, पूर्व कोशाध्यक्ष आनंद कुमार, पटना उच्य न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता उमा शंकर आदि जैसे व्यक्ति इसके उदाहरण हैं।

जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि इनके असंवैधानिक कारनामों के कारण हीं आज बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के बैंक खाते के परिचालन पर रोक लगी हुई है, निबंधन विभाग में दाखिल संसोधन प्रस्ताव अब तक लंबित है। श्री कुमार ने अपने बयान में कहा है कि बीसीसीआई से सम्बद्ध सभी राज्यों को बीसीसीआई द्वारा फंड दिया गया मगर बिहार को अब तक फंड का नहीं मिलना विवादित अध्यक्ष कि सबसे बड़ी असफलता है।

श्री कुमार ने कहा कि बिहार क्रिकेट लीग का आयोजन बिहार के क्रिकेटरों का सपना था, सभी क्रिकेटर उत्साहित थे, मगर राकेश कुमार तिवारी के असंवैधानिक कारनामों और व्यक्तिगत हित के कारण उस पर भी रोक लगा दी गई। जारी विज्ञप्ति में श्री कुमार ने कहा कि इस आयोजन और आयोजन प्रबंधन के लिए कि गई व्यवस्था में कई ऐसी कमी रह गई जो बिहार के खिलाड़ियों को इतने बड़े आयोजन से तत्काल वंचित कर दिया, जैसे इस आयोजन के लिए पूर्व से तय संस्था युवा खेल फाउंडेशन के जगह किसी दूसरे संस्था को आयोजन कराने के लिए अधिकृत करना,असंवैधानिक रूप से गवर्निंग कांशिल का गठन करना आदि प्रमुख है।

श्री कुमार ने आगे कहा कि पूर्व कि कमेटी और वर्तमान कमेटी के द्वारा जब युवा खेल फाउंडेशन को अधिकृत कर दिया गया तो फिर इस संस्था के जगह पर किसी दूसरे संस्था को आयोजन के लिए अधिकृत करना कहीं अवैध धन उगाही का मामला तो नहीं।



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